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मीडिया ने अंजली केस मे माँ से की बात, माँ की बेबसी और दुख सुनकर दहल जाएगा दिल

शाम को नई पैंट और गुलाबी जैकेट पहनकर घर से निकल रही थी फिर माँ से पूछा कि मैं कैसी दिखती हूँ और उन्होंने कहा कि वह बहुत प्यारी थी। मैंने अपनी अपने हाथों से उसका नजर उतारा और फिर वह चली गई। रात में फोन किया तो उसका मोबाइल बंद मिला। मैंने सोचा था सुबह हमेशा की तरह लौट आएगी, लेकिन वह आखिरी बार था जब मैंने उसे देखा था।
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कंझावाला केस 

ये हैं उसी बेटी की मां सर पर नीले साल को ओढ़े हुए जिसकी मारी हुई बेटी पिछले तीन दिनों से सुर्खियों में हैं जिसने अपनी जिंदगी खो दी बस कुछ दरिंदों के बजह से । हर कुछ घंटों में एक नया रहस्यो का खुलाशा हो राहा है  दरिंदगी, क्रूरता और न्याय जैसे शब्द हवा में तैर रहे हैं। इन सबके बीच अपनी 20 साल की बेटी को खो चुकी 38 साल की मां बेहोशी की हालत मे जमीन पर पड़ी है जिसको आप देख सकते है जो न बोल पा रही ना रो पा रही है , रजाई और कंबल में लिपटी यह महिला फिलहाल महज एक टेप रिकॉर्डर है, जिससे पेचीदा सवालों के सनसनीखेज जवाब मांगे जा रहे हैं। 

उसकी थकान उसकी आँखों की तुलना में उसकी आवाज़ में अधिक स्पष्ट है, और इससे पहले कि वह माइक्रोफोन पर रखे, वह अपनी किडनी, अपने बच्चे और न्याय के बारे में बड़बड़ाने लगती है। मुझे कंबल में छिपे उसके हाथ महसूस होते हैं और धीरे-धीरे वे पिघलने लगते हैं।

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बेटी का बच्चपन बोल रो पड़ी माँ 

वह छह भाई-बहनों में दूसरी संतान थी और हम उसे भट्टो कहते थे। उसकी बड़ी-बड़ी आँखें थीं, बिल्कुल अपने पिता की तरह। एक बार हँसने लगी तो रुक नही सकटी थी ; और जब उसने खेलना शुरू किया, तो वह सारा दिन खेलना चाहती थी। जब मेरी बेटी बड़ी हुई तो उसने काम करना शुरू किया और एक आदमी की तरह घर की देखभाल की। उसको चटर मटर खाने का बहुत मन करता था वह हमेशा बोलती थी माँ आज यह बनाओ माँ आज वह बनाओ कभी-कभी तो किचन मे खुद चली जाया करती थी और खाना बनाने लगती थी उसको चिकन बहुत पसंद था वह अक्सर बनती थी । हमेशा खुश रहती थी हस्ती-मुस्कुराती काम पर जाया करती थी । 

बेटी ही चलाती थी घर 

माँ ने बोला वह रोटी कमाने वाली हुआ करती थी और किराने के सामान से लेकर दवा तक हर चीज का ध्यान रखती थी। जब उसकी शादी का समय आया तो उसने सबसे पहले अपनी छोटी बहन की शादी करवा दी। वह फूलों को छिड़कती थी और कार्यक्रमों में मेहमानों का अभिवादन करती थी, और उस थोड़ी सी आय से घर चलाने में मदद मिलती थी।

माँ की दोनों किडनीय फेल है जब अंजली छोटी थी तभी उसके माँ का किडनी फेल हो गया था उनके पति का भी देहहांत बहुत पहले ही हो चूका है वही घर का देख-भाल करती थी खाना-पानी दवा सब ओहि देखती थी । माँ के इस दर्द को सुन कर दिल कांप उटता है की अब वह बेचारी माँ कैसे रहेगी जिसकी पूरी उम्मीद चली गयी ।